Sunday, August 06, 2006

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॥
॥ अथ ईशोपनिषत् ॥

ॐ ईशा वास्यमिदँ सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् ।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम् ॥१॥
व्‍याख्‍या :- अखिल विश्‍व मे जो कुछ भी गतिशील अर्थात चर अचर पदार्थ है, उन सब मे ईश्‍वर अपनी गतिशीलता के साथ व्‍याप्‍त है उस ईश्‍वर से सम्‍पन्‍न होते हुये से तुम त्‍याग भावना पूर्वक भोग करो। आसक्‍त मत हो कि धन अथवा भोग्‍य पदार्थ किसके है अथार्थ किसी के भी नही है ? अत: किसी अन्‍य के धन का लोभ मत करो क्‍योकि सभी वस्‍तुऐ ईश्‍वर की है। तुम्‍हारा क्‍या है क्‍या लाये थे और क्‍या ले जाओगे।

कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतँ समाः।
एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति न कर्म लिप्यते नरे ॥२॥
व्‍याख्‍या :- इस भौतिक जगत् मे शास्‍त्र निर्दिष्‍ट अर्थात अग्निहोत्र आदि कमों को करते हुये सौ वर्षो तक जीने की इच्‍छा करें यही मनुष्‍य की अधिकतम आयु है इस प्रकार मनुष्‍यत्‍वाभिमानी कर्म लिप्‍त नही होगे। इसके अतिरिक्‍त दूसरा मार्ग भी नही है।

असुर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसाऽऽवृताः ।
तांस्ते प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः ॥३॥
व्‍याख्‍या :- असुरो सम्‍बन्‍धी अर्थात अज्ञानियों के वे प्रसिद्ध लोक, अश्ज्ञरन रूपी गहन अन्‍धकार से आच्‍छदित है। वे अज्ञानी लोग जो अत्‍मा का हनन करते वाले अविद्या दोष से ग्रसित जीव है जो मर कर भी दु:ख क्‍लेश रूपी भयंकर लोको को जाते है। अर्थात वह जन्‍म मृत्‍यु के बन्‍धन को बार-बार प्राप्‍त करता है।
अनेजदेकं मनसो जवीयो नैनद्देवा आप्नुवन्पूर्वमर्षत् ।
तद्धावतोऽन्यानत्येति तिष्ठत्तस्मिन्नपो मातरिश्वा दधाति ॥४॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
तदेजति तन्नैजति तद्दूरे तद्वन्तिके ।
तदन्तरस्य सर्वस्य तदु सर्वस्यास्य बाह्यतः ॥५॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
यस्तु सर्वाणि भूतान्यात्मन्येवानुपश्यति ।
सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते ॥६॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
यस्मिन्सर्वाणि भूतान्यात्मैवाभूद्विजानतः ।
तत्र को मोहः कः शोक एकत्वमनुपश्यतः ॥७॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
स पर्यगाच्छुक्रमकायमव्रण-मस्नाविरं शुद्धमपापविद्धम् ।
कविर्मनीषी परिभूः स्वयम्भू-र्याथातथ्यतोऽर्थान् व्यदधाच्छाश्वतीभ्यः समाभ्यः ॥८॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
अन्धं तमः प्रविशन्ति येऽविद्यामुपासते ।
ततो भूय इव ते तमो य उ विद्यायां रताः ॥९॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।

अन्यदेवाहुर्विद्ययाऽन्यदाहुरविद्यया ।
इति शुश्रुम धीराणां ये नस्तद्विचचक्षिरे ॥१०॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह ।
अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययाऽमृतमश्नुते ॥११॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
तमः प्रविशन्ति येऽसम्भूतिमुपासते ।
ततो भूय इव ते तमो य उ सम्भूत्यां रताः ॥१२॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
अन्यदेवाहुः सम्भवादन्यदाहुरसम्भवात् ।
इति शुश्रुम धीराणां ये नस्तद्विचचक्षिरे ॥१३॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
सम्भूतिं च विनाशं च यस्तद्वेदोभयं सह ।
विनाशेन मृत्युं तीर्त्वा सम्भूत्याऽमृतमश्नुते ॥१४॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम् ।
तत्त्वं पूषन्नपावृणु सत्यधर्माय दृष्टये ॥१५॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
पूषन्नेकर्षे यम सूर्य प्राजापत्य व्यूह रश्मीन् समूह तेजः ।
यत्ते रूपं कल्याणतमं तत्ते पश्यामि योऽसावसौ पुरुषः सोऽहमस्मि ॥१६॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
वायुरनिलममृतमथेदं भस्मांतं शरीरम् ।
ॐ क्रतो स्मर कृतं स्मर क्रतो स्मर कृतं स्मर ॥१७॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
अग्ने नय सुपथा राये अस्मान् विश्वानि देव वयुनानि विद्वान् ।
युयोध्यस्मज्जुहुराणमेनो भूयिष्ठां ते नमउक्तिं विधेम ॥१८॥
कृपया प्रतीक्षा करे कार्य प्रगति पर है।
इति ईशोपनिषत् ॥
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते ।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॥

पाठकों तथा विद्वानो जनों से अनुरोध है कि गलतियो तथा सुझावो अवश्‍य बताये तकि सुधार किया जा सके। मै आभारी रहूंगा।